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जेजेरो क्रेटर क्या है और कहाँ पर है ? (What is and where is Jejero crater ?)

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जेजेरो क्रेटर (Jejero Crater)

नासा ने मंगल मिशन पर जीवन की खोज करने के लिए 18 फरवरी 2021 को पेरसेवरांस रोवर (Perseverance Rover) को मंगल ग्रह जिसे लाल ग्रह भी कहा जाता है, के लिए भेजा जो 20 फरवरी 2021 को लाल ग्रह के लैंडिंग स्पैस पर सफलता पूर्वक उतर गया । उस लैंडिंग स्पेस का ही नाम Jejero Crater है ।

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  • जेजेरो क्रेटर, इसिडियस प्लैनेटिया (Isidis planitia) नामक एक सपाट मैदान के पश्चिमि किनारे पर स्थित है , जो मार्टियन भुमध्य रेखा (Martian equator) के उत्तर (north) में स्थित है ।
  • जेजेरो क्रेटर का ब्यास (diameter) लगभग 45 Km यानी कि 28 मील है ।
  • परसेवरांस रोवर के लिए लैंडिंग साइट के रुप में Jezero crater को चुनाव NASA के वैज्ञानिकों के एक टीम ने बहुत ही जाँच और सुझ-बूझ के साथ किया । इस टीम में विश्व के अलग-अलग देशों के 60 वैज्ञानिकों थे ।
  • नासा के इस अभियान से जुड़े वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है, कि इस जेजेरो क्रेटर पर 35 अरब साल से भी पहले यहाँ पर नदी, नाले और झील रहे होंगे।
  • इस बात का भी प्रमाण मिला है, कि क्रेटर पर कभी पानी , मिट्टी के खनिजों को अपने साथ बहाकर झीलों में ले गया , इस वजह से इन पानी वाले गीले क्षेत्रों में निश्चित तौर पर सूक्षम जीव (microbial life ) रहे होंगे ।
  • नासा के वैज्ञानिक इस क्रेटर क्षेत्र में सूक्षमजीवों के अवशेषों के निशान पूर्व में झील के किनारे या तटरेखा के तलहट में पाने की कोशिश कर रहे हैं ।
  • साथ ही साथ यह भी अध्ययन करेंगे कि यह क्रेटर क्षेत्र कैसे और कब विकसित हुआ ।

Source -NASA

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मंगल ग्रह पर ऑक्सीजन के निर्माण में नासा को मिली सफलता NASA’s success in building Oxygen on Mars)

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नासा के वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह जिसे लाल ग्रह के नाम से भी जाना जाता है वहाँ पर ऑक्सीजन के निर्माण में सफलता हासिल कर ली है ।

नासा ने 2020 में एक मंगल मिशन शुरु किया ,इस मिशन में नासा ने 18 फरवरी 2020 को पेरसेवरांस रोवर (Perseverance Rover) को मंगल ग्रह के लिए रवाना किया था जो 20 फरवरी 2020 को मंगल ग्रह की सतह पर सफलता पूर्वक उतरा एवं उतरने के बाद परीक्षण 20 अप्रैल को 60 वें मंगल दिवस या सौल में हुआ ।

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नासा के मंगल मिशन 2020 के Perseverance Rover ने हाल ही में 19 अप्रैल 2021 को मंगल ग्रह पर कार्बनडाईऑक्साईड (CO2 ) को ऑक्सीजन (O2) में परिवर्तित किया है । खलोग विज्ञान के इतिहास में ऐसाा पहली बार हुआ है, जब पृथ्वी के अलावा किसी दूसरे ग्रह पर ऑक्सीजन का निर्माण हुआ है । इस कार्य में MOXIE (Mars Oxygen In-Situ Resource Utilization Experiment) की मदद से संंभव हो पाया है ।

MOXIE क्या है ?

MOXIE : उपकरण के अंदर तत्वों का चित्रण, Credit- NASA / JPL
  • MOXIE का पूरा नाम Mars Oxygen In-Situ Resource Utilization Experiment है । यह Perseverance Rover में लगा हुआ गोल्डेन बाक्स उपकरण है ।
  • मंगल ग्रह पर 96% कार्बनडाइऑक्साइड है । MOXIE नामक यह उपकरण कार्बनडाईऑक्साईड के अड़ुओं (Molecules) को बिजली और रसायन की मदद से कार्बन एवं ऑक्सीजन के अड़ुओं (molecules) में परिवर्तित करता है और साथ ही साथ एक और रसायन मोनोऑक्साइड पैदा करता है । इस सभी बजह से MOXIE को Mechanical tree भी कहा जाता है ।
  • MOXIE के पहले परीक्षण में यह पाया गया , कि यह 5 ग्राम ऑक्सीजन प्रति घंटा की दर से उत्पादन किया ।
  • मैसाचुसेट्स इंसट्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी , हेस्टेक बेधशाला (Massachusetts Institute Of Technology Haystack Observatory ) के वैज्ञानिक एवं MOXIE के मुख्य अन्वेषक माइकल हेचेट (Michael Hecht) ने कहा कि एक समान्य गतिविधी करने वाले अंतरीक्ष यात्री के लिए यह 5 ग्राम ऑक्सीजन 10 मिनट तक साँस लेने के लिए पर्याप्त है ।
  • माइकल हेचेट ने कहा कि MOXIE की क्षमता प्रति घंटा 10 ग्राम ऑक्सीजन उत्पन करने की है ।
  • MOXIE का निर्माण मैसचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) ने किया है ।
  • MOXIE का निर्माण 3 D प्रिंटेड निकल मिश्र धातु से किया गया है क्योंकि मिश्र धातु गर्मी प्रतिरोधक होता है यह 1470 डिग्री फारेनहाइट (800 सेल्सियस) तक तापमान को आसानी से सहन कर लेता है, क्योंकि मंगल ग्रह पर मौजूद कार्बनडाईऑक्साईड को ऑक्सीजन में परिवर्तित करने के लिए 1470 डिग्री फारेनहाइट तापमान की आवश्यक्ता होती है ।
  • MOXIE के बाहरी दीवारों को सोने (Gold) के लेप से ढका हुआ है ताकि ऑक्सीजन बनाने के दौरान पैदा होने वाला तापमान रोवर को नुकसान न पहुँचा सके ।
  • MIT के वैज्ञानिकों का दावा है , कि एक टन संस्करण का MOXIE मंगल ग्रह पर 25 टन ऑक्सीजन पैदा करने में समक्ष हो पायेगा