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प्रधान मंत्री मोदी ने की तारीफ-किलो भर मशरूम की शुरूआती खेती ने बदली तकदीर.

बिहार के मुंगेर जिला की महिला श्रीमती वीणा ने मात्र एक किलो मशरूम के बीज से जगह न होने की वजह से ,घर में ही खेती करना शुरू की और फिर धीरे-धीरे उनका यह व्यवसाय फलने-फूलने लगा. आज वो अपने कई नजदीक के जिलों में मशरूम की खेती की प्रशिक्षण देती हैं एवं किसान लोगों के लिए प्रेरणा का श्रोत भी बन चुकी हैं.

कहते हैं, कि अगर दिल में कुछ कर गुजरने की तम्मना हो और सच्ची लगन से अगर सही दिशा में कार्य किया जाये तो.सफलता खुद-ब-खुद एक दिन कदम चूमती है और इस बात की उदाहरण है, बिहार के मुंगेर जिले की महिला वीणा जी. 08 मार्च 2020 को महिला दिवस के उपलक्ष में खुद प्रधान मंत्री श्री नरेंन्द्र मोदी जी भी उनकी तारीफ करते हुए नहीं थके.

बिहार के मुंगेर जिला की महिला श्रीमती वीणा ने मात्र एक किलो मशरूम के बीज से जगह न होने की वजह से ,घर में ही खेती करना शुरू की और फिर धीरे-धीरे उनका यह व्यवसाय फलने-फूलने लगा. आज वो अपने कई नजदीक के जिलों में मशरूम की खेती की प्रशिक्षण देती हैं एवं किसान लोगों के लिए प्रेरणा का श्रोत भी बन चुकी हैं.

कैसे करें मशरूम की खेती की शुरूआत

भारत में समान्ययतः तीन तरह के मशरूम का उत्पादन होता है, सितम्बर महीने से 15 नवंबर तक ढ़िगरी मशरूम का उत्पादन कर सकते हैं, इसके बाद आप बटन मशरूम का उत्पादन कर सकते हैं, फरवरी-मार्च तक ये फसल चलती है, मार्च के बाद मिल्की मशरूम का उत्पादन कर सकते हैं जो जून जुलाई तक चलता है। इस तरह आप साल भर मशरूम का उत्पादन कुुुल तीन चरणोंं में कर सकते हैं.

मशरूम तैयार करने की विधि

साधारण विधि से कम्पोस्ट बनाने में 20 से 25 दिन का समय लगता है। 100 सेंमी लम्बी, 50 सेंमी चौडी तथा 15 सेंमी ऊची 15 पेटियों के लिए इस विधि से कम्पोस्ट बनाने के लिए सामग्री:

  1. धान या गेहूं का 10-12 सेंमी लम्‍बाई में कटा हुआ पुआल – 250 किलोग्राम
  2. धान या गेहूं की भूसी – 20-25 किलोग्राम
  3. अमोनियम सल्‍फेट या कैल्शियम अमोनियम नाईट्रेट – 4 किलोग्राम
  4. यूरिया – 3 किलोग्राम
  5. जिप्सम – 20 किलोग्राम
  6. मैलाथियॉन – 10 किलोग्राम

बटन मशरुम कु खेती की शुरूआत बिशेष रुप से तैयार की गयी.कम्सपोट के द्वारा की जाती है. इसके लिए ऐसे स्थान का चुनाव करे जो आपके अनुकूल हो और उस जगह पर आप आसानी से कम्पोस्ट तैयार कर सके. जिस जगह पर कम्पोस्ट तैयार करनी हो वहां पर गेहूं के भूसे की 8 से 10 इंच मोटी तह बिछाकर उसे पानी से अच्छी तरह से भिगो दें. पानी में भीगोने के लगभग 16 से 18 घंटे बाद उसमें  जिप्सम तथा कीटनाशक को छोडकर बाकी सभी सामग्री अच्छी तरह से मिला दें. फिर उस सारी सामग्री का एक मीटर चौडा, एक मीटर ऊचा तथा समायोजित लम्बाई का ढेर बना दें. इस ढेर को प्रत्येक 3-4 दिन के अंतराल पर हवा लगाने के लिए फर्श पर खोलकर बिछा दें तथा आधा घंटे बाद दोबारा उसी आकार का ढेर बना दें. अगर भूसा सूखा लगे तो उस पर हल्‍का पानी छिडककर गीला कर लें. तीसरी पलटाई के दौरान कुल  जिप्सम की आधी मात्रा मिला दें. शेष बचे  जिप्सम को चौथी पलटाई के दौरान भूसे में मिला दें. पॉचवी पलटाई के दौरान 10 मिलि लिटर मैलाथियान को 5 लीटर पानी में घोलकर भूसे पर छिडकाव करें तथा अच्‍छी तरह से मिलाकर फिर से ढेर बना दें. अगले 3 से 4 दिनों में कम्पोस्ट खाद पेटियों में भरने योग्य हो जायेगा मशरूम का उत्पादन अच्‍छी कम्पोस्ट खाद पर निर्भर करता है अत: कम्पोस्ट बनाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए .

इसके लिए आप अपने जिला के कृषि केंद्र से भी संपर्क कर सकते है, जहाँ पर आपको उन्नत किस्म के बीज एवं प्रशिक्षण की जानकारी प्राप्त होगी. चूँकि.मशरूम मे काफी फ्रचुर मात्रा मे खनिज, विटामिन्स पाये जाते है।मशरूम में कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं जिनकी शरीर को बहुत आवश्यकता होती है . मशरूम फाइबर का भी एक अच्छा माध्यम है .मशरूम का इस्तेमाल कई बीमारियों में दवाई के तौर पर किया जाता है . मशरूम हेल्थ कॉन्शस लोगों के लिए भी यह अच्छा होता है, क्योंकि इसमें कैलोरीज ज्यादा नहीं होतीं है.

आजकल मशरूम की खेती भारत में बहुत ही बड़े पैमाने पर की जाने लगी है, कारण कि घरेलू बाजार सहित विदेशी बाजारों में भी इसकी मांग बढ़ती जा रही है. मशरूम की खेती आजकल बड़े पैमाने पर एक व्यवसाय का रुप ले चुका है , जो कि किसानों के लिए काफी लाभप्रद है.

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