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Agriculture

अगर आप भी करते हैं खेती तो पढ़े कृषि सिचाई योजना के लाभ.

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से कैसे हों लाभान्वित

भारत एक कृषि प्रधान देश है ये हम सभी जानते हैं और कृषि एक ऐसा ब्यवसाय है जो मुख्यतः प्राकृति पर नि्र्भर होती है। मानसून का साथ न होने पर खेति मेहनत के साथ-साथ बहुत खर्चीला ब्यवसाय हो जाता है। कृषि जगत के क्षेत्र में इतना तकनीकी विकास होने के बावजूद भी,आजकल सिंचाई की समस्या ही मुख्य रुप से कृषि के लिए चुनौती बनी हुई है. इसी समस्या से निजात पाने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2015-16 में सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरुआत की गयी है। वर्तमान में बिहार में इस सिंचाई प्रणाली लगभग कुल आच्छादित क्षेत्र (ऐसी भूमि जहाँ सिचाई ब्यवस्था नहीं है) का 0.5 प्रतिशत क्षेत्र में ही अपनाया जा रहा है। कृषि रोड मैप में यह निर्धारित किया गया है कि वर्ष 2017-22 में इस प्रणाली को कम से कम कुल आच्छादित क्षेत्र के लगभग 2 प्रतिशत क्षेत्रों में प्रतिष्ठापित किये जाने का लक्ष्य प्राप्त करना है, ताकि बिहार के सब्जी एवं फल का उत्पादकता एवं उत्पादन में बढ़ोतरी हो। इस योजना अन्तर्गत किसानों को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त टाॅप-अप प्रदान करते हुये सभी श्रेणी के कृषकों को ड्रीप अन्तर्गत 90 प्रतिशत एवं स्प्रिंकलर अन्तर्गत 75 प्रतिशत सहायता अनुदान देने का प्रावधान है।

जानें कृषि सिंचाई योजना को सफल बनाने के उपाय

सूक्ष्म सिंचाई एक उन्नत सिंचाई प्रणाली है जिसके द्वारा पौधे के जड़ क्षेत्र में विशेष रूप से निर्मित प्लास्टिक पाईपों
द्वारा कम समय अन्तराल पर पानी दिया जाता है जिससे कि पारंपरिक सिंचाई की तुलना में 60 प्रतिशत कम जल की खपत होती है।इस
प्रणाली अन्तर्गत ड्रीप सिंचाई पद्दति, स्प्रिंकलर सिंचाई पद्दति एवं रेनगन सिंचाई पद्दति उपयोग किया जाता है.

Rain irrigation
drimp irrigation

सूक्ष्म सिंचाई के अन्तर्गत जल वितरण लाइनो और साज समान कन्ट्रोल हेड प्रणाली एवं उर्वरक टैन्क रहते हैं। इस प्रणाली को अपनाकर यदि उर्वरक का व्यवहार इसके माध्यम से किया जाय तो इससे लगभग 25 से 30 प्रतिशत उर्वरक की बचत होती है। इस सिंचाई प्रणाली से फसल के उत्पादकता में 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि तथा उत्पाद की गुणवता उच्च होती है। इस सिंचाई प्रणाली से खर-पतवार के जमाव में 60 से 70 प्रतिशत की कमी होती है जिसके कारण मजदुरों के लागत खर्च में कमी तथा पौधों पर रोगो के प्रकोम में भी कमी आती है। तो है ना सूक्ष्म सिंचाई फायदेमंद।

कृषि सिंचाई योजना के लिए पात्रता

कृषि सिंचाई योजनि का लाभ लेने के लिए शर्तें निम्नलिखित हैंः-
1. किसान के पास स्वयं की भुमि अथवा 7 वर्षों का लिज का भुमि होना आवश्यक है.
2. स्वयं की भुमि की स्थिति में L.P.C होना आवश्यक है.
3. अगर लीज का जमीन है तो 7 वर्षों का निबंधित लीज/1000.00 रूपये का स्टाम्प पेपर पर लीजदाता एवं लीज लेने वाले का नाम प्रथम श्रेणी के दण्डाधिकारी के समक्ष लिया गया शपथपत्र.
4. ड्रीप सिंचाई हेतु कम-से-कम 0.5 एकड़ रकवा तथा अधिक से अधिक 12.5 एकड़ रकवा तथा स्प्रिंकलर सिंचाई हेतु कम से कम 1 एकड़ एवं अधिकतम 5 एकड़ तक लाभ लिया जा सकता है.
5. इस योजना का लाभ जो किसान पुर्व में ले चुके है उन्हें 7 वर्षों बाद ही पुनः योजना का लाभ देय होगा.
6. किसान का निबंधन DVR Portal पर आवश्यक है.
7. छोटे किसान योजना का लाभ समुह में ले सकते हैं.
8. योजना का लाभ वयक्तिगत रुप से लेने हेतु जल श्रोत आवश्यक है.
9. अगर किसान स्वंय अनुदान का लाभ अपने बैंक खाते में लेना चाहते हैं तो उनका बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक होना आवश्यक है.
10. अनुसुचित जाति एवं अनुसुचित जनजाति पर क्रमशः 16 एवं 1 प्रतिशत कुल कर्णांकित राशि का व्यय आवश्यक है.
11. आवेदन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर Online स्वीकृत किया जायेगा.

प्रिय पाठक, आशा करता हूँ कि ये जानकारी आपको अच्छी लगी होगी, या आपको कैसी लगी. कृप्या अपना बहुमूल्य सुझाव जरुर दे.. बहुत-बहुत धन्यवाद.

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